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DNA ANALYSIS: Why coronavirus does not have china variant | DNA ANALYSIS: कोरोना वायरस का चीन वाला वैरिएंट क्यों नहीं, यहां भी माइंड गेम खेल रहा ड्रैगन?

नई दिल्ली: क्या आपने कोरोना वायरस के चीन वैरिएंट के बारे में सुना है? आज पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के कई नए स्ट्रेन आ चुके हैं और इन सभी को उन देशों के नाम के साथ जोड़ा जा रहा है, जहां से वो निकले हैं. इसका UK वैरिएंट है. दक्षिण अफ्रीका का वैरिएंट है. ब्राजील का है और अब तो भारत का भी नया वैरिएंट आ गया है. लेकिन जिस चीन के वुहान शहर से ये वायरस पूरी दुनिया में फैला उसका कोई वैरिएंटर नहीं हैं.

इस समय पूरी दुनिया कोरोना वायरस की वजह से संघर्ष कर रही है. और ये बात सब जानते हैं कि इस वायरस की शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई थी. लेकिन अब कहीं भी चीन का नाम सुनाई नहीं देता, जहां से ये वायरस पूरी दुनिया में फैला.

कोरोना वायरस को कोई वुहान वायरस क्यों नहीं कहता? 

आज कोई भी कोरोना वायरस को वुहान वायरस नहीं कहता क्योंकि खुद WHO को इस पर आपत्ति है. WHO कहता है कि वायरस किसी देश या क्षेत्र की सीमा तक ही सीमित नहीं रहता है, वो दुनिया के हर कोने में फैल सकता है. इसलिए कोरोना वायरस को वुहान वायरस या चीनी वायरस कहना गलत है.

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हम भी WHO के इस पक्ष से सहमत हैं, लेकिन हमारा यहां एक सवाल है कि जब पूरी दुनिया में ब्रिटेन से फैले कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन को ब्रिटेन वाला स्ट्रेन कहा गया. अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के स्ट्रेन को उनके देश के नाम से जोड़ा गया है. तो फिर कोरोना वायरस को वुहान वायरस क्यों नहीं कहा जाता.

WHO का दोहरा चरित्र

हमारा मानना है कि इस वायरस की Geo Tagging होनी चाहिए थी. लेकिन WHO ने ऐसा नहीं किया. Geo Tagging का मतलब है सूचना का ब्योरा. जैसे किसी तस्वीर की Geo Tagging On है तो आपको ये पता चल जाएगा कि वो तस्वीर कब, कहां और किस समय खींची गई थी. यानी WHO को कोरोना वायरस की Geo Tagging करनी चाहिए थी, जिससे ये पता चलता कि पूरी दुनिया में ये कहां से फैला था, किस जगह से फैला था और कैसे फैला था?

इसे कुछ उदाहरणों से समझिए. अफ्रिकन हाथी, जो अफ्रीका के जंगलों में पाया जाता है, Royal Bengal Tiger जो एक दुर्लभ शेर है और ये बंगाल में पाया जाता है और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, जो एक लुप्तप्राय दुनिया का सबसे भारी पक्षी है, ये भी भारत में पाया जाता है. इन सब की एक खास बात ये है कि ये एक विशेष क्षेत्र में पाए जाते हैं और इनके नाम जगहों के नाम पर हैं.

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देश से जुड़े बीमारियों के नाम

अब अगर वायरस की बात करें तो पूरी दुनिया में ऐसी कई बीमारियां हैं, जो जिन देशों, राज्यों और क्षेत्रों से फैलीं उनका नाम भी उसी पर रखा गया. इसे कुछ उदाहरणों से समझिए
Spanish Flu- इसे ये नाम इसलिए मिला क्योंकि ये बीमारी पहली बार स्पेन में फैली थी. 
Zika Virus- पहली बार वर्ष 1947 में इस वायरस की पहचान हुई थी. तब युगांडा के Zika Forest क्षेत्र में ये संक्रमण मिला था और इसीलिए इसे दुनिया ने Zika Virus कहा. 
Ebola Virus का नाम भी इसी तरह पड़ा. वर्ष 1976 में अफ्रीका महाद्वीप में Ebola नाम की नदी के पास ये संक्रमण पहली बार फैला था. जिसके बाद इस वायरस को Ebola वायरस कहा गया.
Nipah Virus का भी नामकरण हुआ.मलेशिया के एक गांव है, जिसका नाम है निपाह .वहीं से ये वायरस पहली बार फैला था और दुनिया ने इसीलिए इसे निपाह वायरस कहा.
MERS-CoVid के नाम के पीछे भी कुछ ऐसी ही कहानी है. वर्ष 2012 में पहली बार इस वायरस की पहचान Saudi Arabia में हुई थी. जिसके बाद इसे MERS-CoVid कहा गया. इसका मतलब है Middle East Respiratory Syndrome Coronavirus जिस वायरस से इस समय पूरी दुनिया जूझ रही है. और जो चीन से फैला है. वो इसी वायरस के परिवार का सदस्य है.

इसके अलावा और भी कई बीमारियां हैं, जिनके नाम उन्हीं देशों पर रखे गए, जहां से ये बीमारियां निकल कर दूसरे देशों में पहुंची लेकिन कोरोना वायरस के मामले में ऐसा नहीं हुआ. ये चीन के वुहान शहर से दुनियाभर में फैला. लेकिन विडम्बना देखिए कि हर देश अब इसे एक स्ट्रेन के रूप में जानता है. जो अलग-अलग देशों से आया है. लेकिन चीन का नाम अब कोई नहीं लेता.  

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