Religion

इस बार अधिकमास होने के कारण 4 नहीं पांच महीने तक होगा देवशयन

  • भागवत महापुराण के अनुसार 4 महीने तक क्षीर सागर में योग निद्रा में सोते हैं भगवान विष्णु

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 11:45 PM IST

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इस बार ये पर्व 1 जुलाई को है। इस दिन भगवान योग निद्रा में चले जाएंगे और कार्तिक महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी पर जागेंगे। ये तिथि 25 नवंबर को पड़ रही है। पुराणों में इस एकादशी का अलग-अलग महत्व बताया गया है। पद्म पुराण के अनुसार देवशयनी एकादशी पर व्रत करने से जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण का कहना है कि इस व्रत से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। वहीं भागवत महापुराण के अनुसार इस दिन शंखासुर राक्षस को मारने के बाद भगवान विष्णु क्षीर सागर में 4 महीने के लिए योग निद्रा में चले गए थे। इसलिए इस दिन भगवान को शयन करवाने की परंपरा है।

  • देवशयनी एकादशी से चातुर्मास भी शुरू हो जाता है। आषाढ़ शुक्लपक्ष की एकादशी से कार्तिक शुक्लपक्ष की एकादशी तक का समय चातुर्मास कहलाता है। इस बार चातुर्मास के दौरान अधिकमास होने से भगवान विष्णु करीब 5 महीने तक शयन करेंगे। अब 1 जुलाई से 25 नवंबर तक विवाह और अन्य महत्वपूर्ण मांगलिक काम नहीं हो पाएंगे। चातुर्मास के दौरान पूजा-पाठ, कथा, अनुष्ठान से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। चातुर्मास में भजन, कीर्तन, सत्संग, कथा, भागवत के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है।

पुराणों में देवशयनी एकादशी का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू हो जाता है और चार महीने के लिए 16 संस्कार रुक जाते हैं। हालांकि पूजन, अनुष्ठान, मरम्मत करवाए गए घर में प्रवेश, वाहन और आभूषण खरीदी जैसे काम किए जा सकते हैं।
– इस एकादशी को सौभाग्यदायिनी एकादशी कहा जाता है। पद्म पुराण के अनुसार इस दिन व्रत या उपवास रखने से जाने-अनजाने में किए गए पाप खत्म हो जाते हैं।
– इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार इस व्रत को करने से मनोकामना भी पूरी होती है।
– भागवत महापुराण के अनुसार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को शंखासुर राक्षस मारा गया था। उस दिन से भगवान चार महीने तक क्षीर समुद्र में सोते हैं।

मान्यता: देवशयनी एकादशी से अगले 4 महीने पाताल में रहते हैं भगवान
ग्रंथों के अनुसार पाताल लोक के अधिपति राजा बलि ने भगवान विष्णु से पाताल स्थिति अपने महल में रहने का वरदान मांगा था। इसलिए माना जाता है कि देवशयनी एकादशी से अगले 4 महीने तक भगवान विष्णु पाताल में राजा बलि के महल में निवास करते हैं। इसके अलावा अन्य मान्यताओं के अनुसार शिवजी महाशिवरात्रि तक और ब्रह्मा जी शिवरात्रि से देवशयनी एकादशी तक पाताल में निवास करते हैं।

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