उत्सव: 27 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा; त्रेतायुग में इसी तिथि पर हुआ था हनुमानजी का जन्म, 28 से शुरू होगा वैशाख

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13 घंटे पहले

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मंगलवार, 27 अप्रैल को चैत्र मास की अंतिम तिथि पूर्णिमा है। इसी तिथि पर हनुमानजी का प्राकट्योत्सव मनाया जाएगा। त्रेतायुग में हनुमानजी का जन्म चैत्र पूर्णिमा पर ही हुआ था। इस दिन हनुमानजी को विशेष श्रृंगार करना चाहिए। इसके बाद 28 अप्रैल से वैशाख मास शुरू हो जाएगा।

चैत्र पूर्णिमा नव संवत्सर की पहली पूर्णिमा है। पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने की परंपरा है। इस दिन व्रत-उपवास भी रखा जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार पूर्णिमा पर सुबह जल्दी बिस्तर छोड़ देना चाहिए। स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाकर दिन की शुरुआत करें। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें और उसमें कुमकुम चावल डालकर सूर्य को चढ़ाएं। ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें।

चैत्र पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की भी विशेष पूजा करनी चाहिए। इस दिन तीर्थ स्नान, दान, व्रत और विष्णु पूजा से जाने-अनजाने में किए गए पापों का प्रभाव खत्म होता है। जो लोग चैत्र पूर्णिमा पर धर्म-कर्म करते हैं, उनके घर में सुख-शांति और सफलता का वास होता है।

इस तिथि की रात में चंद्र सोलह कलाओं के साथ दिखाई देता है। जो लोग पूर्णिमा का व्रत करते हैं, वे एक समय भोजन करते हैं। पूर्णिमा पर सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने का भी विशेष महत्व है। कथा का पाठ किसी ब्राह्मण से करवाना चाहिए।

ऐसे कर सकते हैं पूर्णिमा का व्रत

चैत्र पूर्णिमा पर सुबह स्नान करें। घर के मंदिर में भगवान के सामने व्रत करने और पूजा-पाठ करने का संकल्प लें। दिनभर अन्न का त्याग करें। फलाहार और दूध का सेवन कर सकते हैं। शाम को विष्णु-लक्ष्मी, भगवान सत्यनारायण, श्रीराम और हनुमानजी की पूजा करें। जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान करें।

अभी गर्मी का समय है तो लोगों को जूते-चप्पल, छाते का दान करें। घर के बाहर या किसी अन्य स्थान पर प्याऊ लगवाएं या किसी प्याऊ में मटके का दान करें। मौसमी फलों का दान करें। बीमार लोगों की दवाओं की व्यवस्था करें। घर-परिवार में सुखद वातावरण रखें, क्लेश न करें।

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