सफलता की कुंजी: इन गुणों को अपनाएं, जीवन में कभी नहीं देखना पड़ेगा असफलता का मुंह

Safalta Ki Kunji: चाणक्य की चाणक्य नीति कहती है कि व्यक्ति महान अपने आचरण से बनता है. जिसका अचारण श्रेष्ठ है वो सभी को प्रभावित करता है. ऐसे लोग समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं. श्रेष्ठ आचरण करने वाला व्यक्ति सभी को प्रेरणा प्रदान करता है.

विद्वानों का मानना है कि आचरण से ही व्यक्ति की पहचान होती है. आचरण के अनुसार ही व्यक्ति को समाज में यश और अपयश प्राप्त होता है. जब व्यक्ति मानवता से पूर्ण अचारण करता है तो ऐसे व्यक्ति सम्मान प्राप्त करते हैं. इनकी लोकप्रियता अधिक होती है और हर जगह इन्हें मान सम्मान मिलता है. वहीं जो लोग स्वार्थ के चलते गलत अचारण करते हैं वे अपयश प्राप्त करते हैं.

गीता के उपदशे में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि जिसका आचरण श्रेष्ठ है, अच्छे गुणों से पूर्ण है, उसे जीवन में सदैव सफलता और सम्मान प्राप्त होता है. श्रेष्ठ आचरण ज्ञान, अनुभव और संस्कारों से विकसित होता है. इसलिए इन तीनों चीजों को प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को सदैव तैयार रहना चाहिए.

कमजोर को कभी नहीं सताना चाहिए
चाणक्य के अनुसार योग्य, प्रतिभाशाली व्यक्ति वही है जो सभी को साथ लेकर चले. व्यक्ति को कभी भेद नहीं करना चाहिए. योग्य व्यक्तियों का कार्य सभी के लिए होता है. इसमें मानव कल्याण की भावना निहित होती है. निर्बल को सताना नहीं चाहिए, उसे भी प्रेरित करने का कार्य करना चाहिए. जो व्यक्ति दूसरी की मदद के लिए तैयार रहता है, वह सभी का प्रिय होता है.

सत्य को अपनाएं
विद्वानों का मानना है कि जो व्यक्ति सत्य के मार्ग पर चलता है. उसे कभी-कभी कष्ट भी उठाने पड़ते हैं. लेकिन अंत में जीत उसी की होती है क्योंकि सत्य कभी पराजित नहीं होता है. जिस प्रकार से रात के बाद दिन होता है उसी प्रकार से सत्य को झूठ की काली चादर अधिक समय तक ढक कर नहीं रख सकती है. इसलिए निराश नहीं होना चाहिए. सत्य पर अडिग रहना चाहिए.

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